घर में किसी बड़े की मृत्यु हो जाए तो उस दुख के साथ-साथ एक और tension होती है — उनके नाम की जमीन अब कैसे होगी?
बहुत से परिवार इसे टालते रहते हैं — “बाद में देखेंगे”, “अभी ज़रूरत नहीं”। लेकिन जब बैंक से loan लेना हो, जमीन बेचनी हो, या सरकारी योजना का फायदा लेना हो — तब पता चलता है कि जमीन अभी भी मृत व्यक्ति के नाम पर है।
इसी problem का हल है वारासत — जिसे Succession या Inheritance भी कहते हैं।
इस article में हम बताएंगे:
- वारासत क्या होती है और नामांतरण से कैसे अलग है
- कौन-कौन से documents चाहिए
- vaad.up.nic.in पर online apply कैसे करें
- वारासत status कैसे check करें
- अगर कोई objection आए तो क्या करें
Contents
- 1 वारासत क्या होती है?
- 2 वारासत कब ज़रूरी होती है?
- 3 वारासत और नामांतरण में फर्क
- 4 वारासत के लिए Documents
- 5 vaad.up.nic.in पर वारासत Online Apply कैसे करें
- 6 वारासत में क्या होता है — पूरी Process
- 7 वारासत Status Online कैसे Check करें
- 8 वारासत में कितना Time लगता है?
- 9 वारासत में Objection आए तो क्या करें?
- 10 वारासत के बाद क्या करें?
- 11 UP के सभी जिलों में वारासत Process एक जैसी है
- 12 वारासत की Fees कितनी है?
- 13 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- 14 सारांश
वारासत क्या होती है?
जब किसी व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है तो उनकी जमीन का क़ानूनी हक़ उनके वारिसों को मिलता है। लेकिन यह हक़ सरकारी record में तब दर्ज होता है जब वारासत की जाती है।
वारासत एक legal process है जिसमें:
- मृत व्यक्ति के वारिसों की पहचान होती है
- उनके हिस्से तय होते हैं
- और खतौनी में उनका नाम दर्ज होता है
एक important बात — वारासत और नामांतरण दोनों अलग-अलग processes हैं।
वारासत = यह establish करती है कि मृत व्यक्ति के वारिस कौन हैं और उनका हक़ क्या है।
नामांतरण = वारासत के बाद खतौनी में नाम बदलने की process।
यानी पहले वारासत — फिर नामांतरण। दोनों ज़रूरी हैं।
वारासत कब ज़रूरी होती है?
इन सभी situations में वारासत ज़रूरी है:
पिता/माँ की मृत्यु के बाद — जमीन बच्चों के नाम करनी हो।
पति/पत्नी की मृत्यु के बाद — जमीन surviving spouse के नाम करनी हो।
भाई/बहन की मृत्यु के बाद — अगर कोई direct heir नहीं हो।
दादा/दादी की जमीन — अगर पहले कभी वारासत नहीं हुई।
Bank loan के लिए — अगर जमीन मृत व्यक्ति के नाम है तो loan नहीं मिलेगा।
जमीन बेचने के लिए — buyer हमेशा latest खतौनी देखता है।
PM Kisan या सरकारी योजना — जमीन आपके नाम होनी चाहिए।
वारासत और नामांतरण में फर्क
बहुत लोग इन दोनों को एक ही समझते हैं — लेकिन दोनों अलग हैं:
वारासत:
- मृत्यु के बाद होती है
- vaad.up.nic.in पर apply होती है
- Legal heirs establish होते हैं
- Amin (Revenue Inspector) field visit करता है
- Court जैसी process होती है
नामांतरण:
- खरीद-बिक्री के बाद होती है
- तहसील में application देनी होती है
- खतौनी में नाम बदलता है
- Lekhpal verify करता है
Sequence: पहले वारासत → फिर नामांतरण → फिर खतौनी में नया नाम।
वारासत के लिए Documents
वारासत apply करने से पहले यह documents ready रखें:
ज़रूरी documents:
- मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate) — नगर पालिका या ग्राम पंचायत से
- खतौनी की copy — जिसमें मृत व्यक्ति का नाम हो
- Aadhaar Card — आवेदक का
- Aadhaar-linked Mobile Number — OTP के लिए
- सभी वारिसों की जानकारी — नाम, Aadhaar, relation
- Relationship proof — राशन कार्ड, परिवार रजिस्टर
अगर Will (वसीयत) हो तो:
- Registered Will की copy
- इससे process आसान और जल्दी होती है
अगर कोई विवाद हो तो:
- Court order की copy (अगर कोई case हो)
vaad.up.nic.in पर वारासत Online Apply कैसे करें
Step 1 — vaad.up.nic.in खोलें
Mobile या computer में vaad.up.nic.in type करें। यह UP सरकार का Revenue Court Management System (RCCMS) portal है।
Step 2 — “वाद पंजीकरण” या Apply Online चुनें
Homepage पर “ऑनलाइन आवेदन” या “वाद पंजीकरण” option ढूंढें। Succession/वारासत option select करें।

Step 3 — Mobile से Register करें
Aadhaar-linked mobile number डालें। OTP आएगा। OTP verify करके account बनाएं।
Step 4 — आवेदन Form भरें
Form में यह जानकारी भरें:
- मृत व्यक्ति का नाम
- मृत्यु की तारीख
- जनपद, तहसील, ग्राम
- खसरा नंबर और जमीन का विवरण
- आवेदक का नाम और Aadhaar
Step 5 — सभी वारिसों की जानकारी भरें
“Add Heir” button से हर वारिस की जानकारी भरें:
- नाम
- Aadhaar number
- मृत व्यक्ति से relation (बेटा, बेटी, पत्नी, आदि)
Step 6 — Documents Upload करें
Scan की हुई documents upload करें:
- Death Certificate
- खतौनी की copy
- Aadhaar Cards
- Relationship proof
Step 7 — Submit करें
सब check करके Submit करें। एक Application Number मिलेगा — इसे note करें। इसी से status track होगी।
वारासत में क्या होता है — पूरी Process
Application submit होने के बाद यह process चलती है:
1. Application मिलती है — vaad.up.nic.in पर register होती है।
2. Amin की Field Visit — Revenue Inspector (Amin) आपके गाँव में आकर जमीन का physical inspection करता है। यह verify करता है कि जमीन वहाँ है, कोई विवाद नहीं है।
3. Notice जारी होता है — सभी वारिसों को और गाँव में notice लगाया जाता है। 30 दिन का objection period होता है।
4. Objection Period — अगर किसी को आपत्ति हो तो वो इस दौरान court में बता सकता है।
5. Court Order — कोई objection न हो और सब सही हो तो Tehsildar/SDM वारासत का order जारी करते हैं।
6. खतौनी Update — Order के बाद Lekhpal खतौनी में वारिसों का नाम दर्ज करता है।
वारासत Status Online कैसे Check करें
Application submit करने के बाद status घर बैठे check करें:
- vaad.up.nic.in खोलें
- “वाद की स्थिति जानें” या “Application Status” option चुनें
- अपना Application Number डालें
- Status दिखेगा

Status का मतलब:
- दर्ज — Application portal पर register हो गई
- Amin को प्रेषित — Field inspection के लिए गई
- आपत्ति अवधि — Notice period चल रहा है
- सुनवाई — Court hearing हो रही है
- आदेश पारित — Order जारी हो गया ✅
- खतौनी updated — नाम दर्ज हो गया ✅
वारासत में कितना Time लगता है?
नियम के हिसाब से — 3 महीने में होनी चाहिए।
Practically — 3 से 6 महीने। यह depend करता है:
- सभी वारिस सहमत हैं या नहीं
- Documents complete हैं या नहीं
- Amin की availability
- Court का load
जल्दी होने के तरीके:
- सभी वारिसों की NOC / सहमति पहले से तैयार रखें
- Documents complete और clear हों
- Application number से weekly status check करें
वारासत में Objection आए तो क्या करें?
कभी-कभी कोई और claim करता है कि उसका भी हक़ है। ऐसे में:
अगर objection valid नहीं है — तहसील court में अपना side रखें। Documents दिखाएं — Death Certificate, Relationship proof, Will (अगर हो)।
अगर genuinely multiple heirs हैं — सबका हिस्सा तय करना होगा। Family में बात करके settle करें — litigation से बचें, समय और पैसा दोनों बचेंगे।
अगर कोई fraud claim करे — Advocate से मिलें और court में proper legal defense करें।
वारासत के बाद क्या करें?
वारासत order आने के बाद यह steps ज़रूरी हैं:
नामांतरण करवाएं — वारासत order के साथ तहसील में नामांतरण application दें। इससे खतौनी में officially नाम आएगा।
रियल टाइम खतौनी check करें — upbhulekh.gov.in पर जाकर verify करें कि नाम आ गया।
वारासत certificate download करें — vaad.up.nic.in से certified copy download करें और safe रखें।
Bank को update करें — अगर जमीन पर कोई loan था तो bank को inform करें।
PM Kisan update करें — नई खतौनी से PM Kisan registration update करें।
UP के सभी जिलों में वारासत Process एक जैसी है
UP के सभी 75 जिलों में vaad.up.nic.in पर वारासत की यही process है।
पश्चिमी UP: गाज़ियाबाद, नोएडा, मेरठ, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, बुलंदशहर, मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर, बागपत
मध्य UP: लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, रायबरेली, फ़र्रुखाबाद, कन्नौज
पूर्वी UP: वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, जौनपुर, आज़मगढ़, मिर्जापुर, बलिया, देवरिया, कुशीनगर, सोनभद्र
बुंदेलखंड: झाँसी, बाँदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, जालौन, ललितपुर
सभी जगह vaad.up.nic.in ही use होता है।
वारासत की Fees कितनी है?
Official portal पर — Application fee बहुत nominal है।
Amin visit — कोई official charge नहीं।
Court order — Free।
ध्यान रखें — अगर कोई दलाल ₹5,000-20,000 माँगे तो यह ज़रूरी नहीं है। Online खुद apply करें या CSC से करवाएं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
वारासत और नामांतरण में क्या फर्क है? वारासत मृत्यु के बाद वारिस establish करती है — vaad.up.nic.in पर होती है। नामांतरण खरीद-बिक्री के बाद खतौनी में नाम बदलता है — तहसील में होता है। मृत्यु के मामले में पहले वारासत फिर नामांतरण।
वारासत के लिए कौन apply कर सकता है? मृत व्यक्ति का कोई भी legal heir — बेटा, बेटी, पत्नी, माँ-बाप। सभी heirs को साथ apply करना बेहतर है।
क्या वारासत online हो सकती है UP में? हाँ। vaad.up.nic.in पर पूरी process online है। Documents upload करें, OTP verify करें और apply करें।
वारासत में कितना time लगता है? नियम 3 महीने है, practically 3-6 महीने। सभी वारिस सहमत हों और documents complete हों तो जल्दी होती है।
अगर Will (वसीयत) हो तो वारासत आसान होती है? हाँ, registered Will होने पर process smooth और fast होती है। Court को heirs verify करने में कम time लगता है।
एक से ज़्यादा वारिस हों तो क्या होगा? सभी के हिस्से तय होंगे। अगर सब सहमत हों तो जल्दी होगा। अगर dispute हो तो court decide करेगी।
वारासत के बाद नामांतरण अलग से करना पड़ेगा? हाँ। वारासत order के बाद तहसील में नामांतरण application देनी होगी। तभी खतौनी में नाम officially बदलेगा।
सारांश
परिवार में किसी की मृत्यु के बाद उनकी जमीन वारिसों के नाम करने के लिए वारासत ज़रूरी है।
vaad.up.nic.in पर जाएं, online apply करें, documents upload करें। Application number से status track करें।
Order आने के बाद तहसील में नामांतरण application दें — तब खतौनी में नाम दर्ज होगा।
जितनी जल्दी करें उतना अच्छा — देरी से विवाद बढ़ते हैं और loan, बिक्री सब रुक जाती है।
किसी problem पर CM Helpline 1076 पर call करें।
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