जमीन से जुड़े दो सबसे ज़रूरी काम हैं — वारासत और दाखिल-खारिज।
लेकिन बहुत लोग इन दोनों को एक ही समझ लेते हैं।
कोई कहता है — “रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज करानी होती है।” कोई कहता है — “पिताजी की मृत्यु के बाद वारासत करानी होती है।”
दोनों बातें सही हैं — लेकिन दोनों अलग-अलग processes हैं।
इस article में दोनों को clearly समझाएंगे — कब क्या करना होता है, कैसे होता है, और online apply कैसे करते हैं।
इस guide में:
- वारासत और दाखिल-खारिज में असली फर्क
- धारा 33 और धारा 34 क्या हैं
- दोनों के लिए documents
- vaad.up.nic.in पर online apply कैसे करें
- Status कैसे check करें
- कौन पहले होता है — वारासत या दाखिल-खारिज?
Contents
- 1 पहले समझें — तीन terms का मतलब
- 2 धारा 33 और धारा 34 — UP Revenue Code
- 3 वारासत vs दाखिल-खारिज — पूरा फर्क
- 4 वारासत (Section 33) — कब और क्यों ज़रूरी है
- 5 दाखिल-खारिज (Section 34) — कब और क्यों ज़रूरी है
- 6 vaad.up.nic.in पर Online Apply कैसे करें
- 7 Application Status कैसे Check करें
- 8 Court Order कैसे देखें
- 9 कौन पहले — वारासत या दाखिल-खारिज?
- 10 Process के बाद क्या करें
- 11 Common Problems और Solutions
- 12 UP के सभी जिलों में यही Process
- 13 Quick Summary — कौन सी situation में क्या करें
- 14 अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
- 15 सारांश
पहले समझें — तीन terms का मतलब
UP में जमीन के ownership change के लिए तीन terms use होती हैं जो अक्सर confuse करती हैं:
वारासत (Varasat) — मृत्यु के बाद जमीन वारिसों के नाम।
दाखिल-खारिज (Dakhil-Kharij) — खरीद-बिक्री के बाद नया नाम दर्ज।
नामांतरण (Namantran) — यह इन दोनों processes का ही दूसरा नाम है।
सरल भाषा में:
- कोई मरे → वारासत
- कोई खरीदे → दाखिल-खारिज
- दोनों में खतौनी में नाम बदलता है → नामांतरण
धारा 33 और धारा 34 — UP Revenue Code
UP Revenue Code 2006 में जमीन के ownership change के लिए दो धाराएं हैं:
धारा 33 — वारासत (Varasat/Succession) मृत्यु के बाद जमीन वारिसों के नाम करने की legal process।
धारा 34 — नामांतरण (Namantran/Mutation) खरीद-बिक्री, gift deed, या court order के बाद नया नाम दर्ज करने की process।
दोनों के लिए portal एक ही है — vaad.up.nic.in
वारासत vs दाखिल-खारिज — पूरा फर्क
| बात | वारासत (धारा 33) | दाखिल-खारिज (धारा 34) |
|---|---|---|
| कब होता है | मृत्यु के बाद | खरीद-बिक्री/Gift के बाद |
| क्यों होता है | वारिसों को जमीन मिले | नए मालिक का नाम आए |
| Portal | vaad.up.nic.in | vaad.up.nic.in |
| Time limit | जल्दी करें | 45 दिन में करें |
| Main document | Death Certificate | Sale Deed/रजिस्ट्री |
| Process | Court जैसी | Administrative |
| Objection period | 30 दिन | 30 दिन |
| Time | 3-6 महीने | 30-45 दिन |
वारासत (Section 33) — कब और क्यों ज़रूरी है
जब परिवार में किसी की मृत्यु होती है और उनके नाम जमीन होती है — तो वो जमीन automatically वारिसों की नहीं हो जाती।
खतौनी में तब तक मृत व्यक्ति का नाम रहता है जब तक वारासत नहीं होती।
वारासत के बिना:
- बैंक loan नहीं मिलेगा
- जमीन बेच नहीं सकते
- PM Kisan का फायदा नहीं मिलेगा
- सरकारी योजनाओं से वंचित रहेंगे
वारासत के लिए documents:
- मृत्यु प्रमाण पत्र (Death Certificate)
- खतौनी जिसमें मृत व्यक्ति का नाम हो
- सभी वारिसों का Aadhaar Card
- परिवार रजिस्टर / राशन कार्ड
- Aadhaar-linked mobile number
दाखिल-खारिज (Section 34) — कब और क्यों ज़रूरी है
जमीन खरीदने के बाद रजिस्ट्री (Sale Deed) हो जाती है। इससे legally जमीन आपकी हो जाती है।
लेकिन खतौनी में अभी भी पुराने मालिक का नाम होता है।
दाखिल-खारिज के बाद ही:
- खतौनी में आपका नाम आता है
- बैंक loan मिलता है
- भविष्य में जमीन बेच सकते हैं
- सरकारी compensation मिलती है अगर land acquired हो
ज़रूरी बात — रजिस्ट्री के 45 दिन के अंदर दाखिल-खारिज apply करें। देरी से problem बढ़ती है।
दाखिल-खारिज के लिए documents:
- Sale Deed / रजिस्ट्री की copy
- पुरानी खतौनी (seller का नाम)
- नए मालिक का Aadhaar Card
- Stamp duty receipt
- Application form
vaad.up.nic.in पर Online Apply कैसे करें
दोनों processes के लिए portal एक ही है — vaad.up.nic.in
वारासत Apply करना (Section 33)
Step 1 — vaad.up.nic.in खोलें

Step 2 — “उत्तराधिकार / वरासत हेतु आवेदन करें” option चुनें
Step 3 — Mobile number से OTP verify करके login करें
Step 4 — Form भरें:
- मृत व्यक्ति का नाम और मृत्यु तारीख
- जनपद, तहसील, ग्राम
- खसरा नंबर
- सभी वारिसों की जानकारी
Step 5 — Documents upload करें — Death Certificate, Aadhaar, खतौनी
Step 6 — Submit करें — Application Number note करें
दाखिल-खारिज Apply करना (Section 34)
Step 1 — vaad.up.nic.in खोलें
Step 2 — “नामांतरण हेतु आवेदन करें” option चुनें

Step 3 — Mobile number से login करें
Step 4 — Form भरें:
- पुराने मालिक का नाम
- नए मालिक का नाम और Aadhaar
- जमीन का विवरण — जनपद, तहसील, ग्राम, खसरा
- रजिस्ट्री की तारीख और number
Step 5 — Sale Deed, Aadhaar, खतौनी upload करें
Step 6 — Submit करें — Application Number note करें
Application Status कैसे Check करें
दोनों का status vaad.up.nic.in पर देख सकते हैं:
वारासत status:
- vaad.up.nic.in खोलें
- “उत्तराधिकार / वरासत — आवेदन पत्र की स्थिति देखें” पर click करें
- Application Number डालें
नामांतरण status:
- vaad.up.nic.in खोलें
- “नामांतरण — वाद/आवेदन पत्र की स्थिति देखें” पर click करें
- Application Number या Case Number डालें
Status का मतलब:
- दर्ज — Application मिल गई
- Lekhpal/Amin जाँच में — Field verification हो रही है
- आपत्ति अवधि — 30 दिन notice period
- Tehsildar के पास — Final approval pending
- स्वीकृत — हो गया ✅ अब खतौनी update होगी
- अस्वीकृत — Rejected — reason देखें
Court Order कैसे देखें
दोनों में order pass होने के बाद vaad.up.nic.in पर order देख सकते हैं:
- Case/Application number से case search करें
- “आदेश की प्रति देखें” option पर click करें
- Order PDF में खुलेगा — download करें
ध्यान रखें — Online order reference के लिए है। Official काम के लिए tहsील से certified copy लें।
कौन पहले — वारासत या दाखिल-खारिज?
यह question बहुत important है।
अगर जमीन मृत व्यक्ति के नाम है: पहले वारासत → फिर दाखिल-खारिज
वारासत से वारिसों का हक establish होता है। उसके बाद अगर वारिस जमीन बेचना चाहें तो रजिस्ट्री और दाखिल-खारिज होगी।
अगर जमीन खरीदी है (Seller जिंदा है): सिर्फ दाखिल-खारिज — वारासत की ज़रूरत नहीं।
अगर जमीन gift में मिली है: दाखिल-खारिज (Section 34) — Gift Deed के बाद।
Process के बाद क्या करें
वारासत या दाखिल-खारिज approve होने के बाद:
रियल टाइम खतौनी check करें — upbhulekh.gov.in पर verify करें कि नाम आ गया।
Certified Copy लें — tहsील से order की certified copy लें — बैंक और court में काम आएगी।
भू-नक्शा verify करें — upbhunaksha.gov.in पर जमीन का नक्शा check करें।
PM Kisan update करें — अगर किसान हैं तो pmkisan.gov.in पर नई खतौनी से update करें।
Bank inform करें — अगर loan है तो बैंक को नई ownership की जानकारी दें।
Common Problems और Solutions
Problem: Application reject हो गई Rejection notice में reason पढ़ें। Document missing हो तो add करके दोबारा apply करें।
Problem: 6 महीने से ज़्यादा हो गए, कोई update नहीं Naib Tehsildar को written complaint दें। फिर SDM। फिर CM Helpline 1076।
Problem: किसी ने Objection दी Tehsildar court में अपना side रखें — documents दिखाएं। अगर valid objection है तो family settlement करें।
Problem: खतौनी में नाम नहीं आया order के बाद भी Lekhpal से मिलें — order दिखाएं। वो खतौनी update करेगा। 15-20 दिन लग सकते हैं।
UP के सभी जिलों में यही Process
UP के सभी 75 जिलों में vaad.up.nic.in पर यही process है।
पश्चिमी UP: गाज़ियाबाद, नोएडा, मेरठ, आगरा, अलीगढ़, मथुरा, बुलंदशहर, मुज़फ्फरनगर, सहारनपुर, बागपत
मध्य UP: लखनऊ, कानपुर, उन्नाव, हरदोई, सीतापुर, लखीमपुर खीरी, रायबरेली, फ़र्रुखाबाद, कन्नौज
पूर्वी UP: वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, जौनपुर, आज़मगढ़, मिर्जापुर, बलिया, देवरिया, कुशीनगर, सोनभद्र
बुंदेलखंड: झाँसी, बाँदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, जालौन, ललितपुर
Quick Summary — कौन सी situation में क्या करें
| Situation | क्या करें | Portal |
|---|---|---|
| पिताजी की मृत्यु — जमीन उनके नाम | वारासत (Section 33) | vaad.up.nic.in |
| जमीन खरीदी, रजिस्ट्री हो गई | दाखिल-खारिज (Section 34) | vaad.up.nic.in |
| Gift में जमीन मिली | दाखिल-खारिज (Section 34) | vaad.up.nic.in |
| Court order से जमीन मिली | दाखिल-खारिज (Section 34) | vaad.up.nic.in |
| खतौनी में नाम गलत | अंश/नाम संशोधन | upbhulekh.gov.in/ansh/ |
| जमीन विवाद में case | RCCMS | vaad.up.nic.in |
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
वारासत और दाखिल-खारिज में क्या फर्क है? वारासत मृत्यु के बाद होती है — वारिसों का हक establish करती है। दाखिल-खारिज खरीद-बिक्री के बाद होती है — नया मालिक का नाम खतौनी में आता है। दोनों vaad.up.nic.in पर apply होते हैं।
दाखिल-खारिज कितने दिन में करानी चाहिए? रजिस्ट्री के 45 दिन के अंदर। देरी से बैंक loan, future resale में problem आती है।
वारासत और दाखिल-खारिज online हो सकती है UP में? हाँ, दोनों vaad.up.nic.in पर online apply होती हैं। Documents upload करें, OTP से login करें।
Status कहाँ check करें? vaad.up.nic.in पर — वारासत के लिए “आवेदन पत्र की स्थिति” और नामांतरण के लिए “वाद/आवेदन पत्र की स्थिति” option से।
कितना time लगता है? दाखिल-खारिज 30-45 दिन में। वारासत 3-6 महीने में। Documents complete और कोई objection न हो तो जल्दी होता है।
दोनों में fees कितनी है? दोनों officially free हैं vaad.up.nic.in पर। CSC से करवाएं तो ₹20-50 service charge।
अगर कोई objection करे तो? Tehsildar court में hearing होगी। दोनों sides सुनी जाएंगी। Documents के साथ अपना case present करें।
सारांश
वारासत — मृत्यु के बाद जमीन वारिसों के नाम (Section 33) दाखिल-खारिज — खरीद-बिक्री के बाद नया नाम (Section 34)
दोनों के लिए vaad.up.nic.in पर online apply करें। Documents upload करें, Application Number note करें, status track करते रहें।
Order आने के बाद upbhulekh.gov.in पर रियल टाइम खतौनी check करें — नाम आ जाना चाहिए।
किसी भी problem पर CM Helpline 1076 पर call करें।
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