UP में Patta (पट्टा) जमीन Online कैसे Check करें? — Bhulekh Guide 2026
जमीन खरीदने से पहले एक किसान ने खतौनी देखी — सब ठीक लगा, नाम भी सही था। रजिस्ट्री करवा ली।
3 साल बाद पता चला — वह जमीन पट्टे की थी, ग्राम सभा ने सिर्फ खेती के लिए lease पर …
जमीन खरीदने से पहले एक किसान ने खतौनी देखी — सब ठीक लगा, नाम भी सही था। रजिस्ट्री करवा ली।
3 साल बाद पता चला — वह जमीन पट्टे की थी, ग्राम सभा ने सिर्फ खेती के लिए lease पर …
eAnnadata Card के लिए registration करते समय बहुत किसानों को एक field पर अटकना पड़ता है — “DVC Name”।
कुछ लोग सोचते हैं यह PM Kisan जैसी कोई सरकारी scheme है। कुछ सोचते हैं यह कोई error है।
सबसे …
Lucknow के एक छात्र ने UP Scholarship form भरा। “राजस्व ग्राम संख्या” वाले column में अपने गाँव का PIN code डाल दिया।
Application reject हो गई।
दोबारा भरी। इस बार 6 digit का कोई random number डाल दिया।
फिर reject।…
Ballia के एक किसान ने 3 बार PM Kisan status check किया।
हर बार एक ही जवाब — “Land Seeding: No।”
पैसा नहीं आया। पड़ोसी के खाते में आ गया।
किसान सोचता रहा — “खतौनी तो है। जमीन भी है। …
UP Bhulekh portal खोला। खतौनी देखनी है।
“खसरा/गाटा संख्या से खोजें” और “खाता संख्या से खोजें” — दोनों options दिखे।
दोनों में क्या फर्क है?
यह confusion बहुत beginners को होती है। आसान भाषा में समझाते हैं।

खसरा नंबर नहीं पता। खाता नंबर भी नहीं पता।
बस नाम पता है — पिताजी का या दादाजी का।
UP Bhulekh पर नाम से भी जमीन देख सकते हैं। और यह बहुत आसान है।
लेकिन एक common mistake जो ज़्यादातर
हर साल Lekhpal गाँव में आता है। खेतों में जाता है। कुछ नोट करता है। चला जाता है।
यह गिरदावरी है।
बहुत किसान इसे seriously नहीं लेते। लेकिन जब फसल बर्बाद होती है और बीमा claim करना होता है — …
बाढ़ आई। फसल बर्बाद हो गई।
PM Fasal Bima Yojana (PMFBY) का claim लेना है।
लेकिन बिना सही खतौनी के claim process नहीं होगा।
खतौनी फसल बीमा में क्या role निभाती है — और कौन सी खतौनी चाहिए — यह …
UP Bhulekh portal पर एक option है जो बहुत कम लोगों ने notice किया है — “निष्क्रांत संपत्ति”।
यह क्या है? इसे कौन देख सकता है? और यह जमीन खरीदी जा सकती है?
निष्क्रांत…
किसान के पास 5 बीघा जमीन है। लेकिन वो 4-5 अलग-अलग जगह है — एक टुकड़ा यहाँ, एक वहाँ।
खेती करना मुश्किल है। सिंचाई अलग-अलग करनी पड़ती है। रास्ते की problem है।
चकबंदी इसी समस्या का solution है।